SEBI ने शेयर बाजार के क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (CAS) और डेरिवेटिव निपटान की व्यवस्था में बदलाव किए हैं। अधिकांश प्रावधान 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। लगातार चलने वाले कारोबारी सत्र के लंबित लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को CAS में ले जाने वाले नियम 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे। इन्हें आज से लागू बदलाव नहीं कहना चाहिए।
15 अक्टूबर के सर्कुलर में शेयर का नकद बाजार वाला बंद भाव, ऑक्शन का संदर्भ भाव और एक्सपायरी पर डेरिवेटिव का निपटान भाव अलग रखे गए हैं। इनके लिए गणना और कारोबार बंद होने का समय भी एक जैसा नहीं है। नीचे सभी कारोबारी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। CAS की शर्तें इस व्यवस्था में आने वाली प्रतिभूतियों के लिए हैं; हर सूचीबद्ध शेयर पर ऑक्शन लागू होने का दावा नहीं है।
| विवरण | सत्यापित जानकारी | प्राथमिक दस्तावेज़ |
|---|---|---|
| आधिकारिक दस्तावेज़ | 15 अक्टूबर 2026; सर्कुलर HO/47/11/11(3)2025-MRD-POD2/I/23843/2026 | SEBI |
| मुख्य लागू तारीख | 7 दिसंबर 2026; पैरा 4.8 को छोड़कर | SEBI |
| लंबित ऑर्डर के हस्तांतरण की तारीख | पैरा 4.8 के लिए 8 फरवरी 2027 | SEBI |
| CAS का समय | दोपहर 3:30–3:40; ऑर्डर एंट्री 3:38 से 3:40 के बीच किसी अनिश्चित क्षण बंद | SEBI |
| CAS संदर्भ भाव की अवधि | नकद बाजार के नियमित सत्र के अंतिम 15 मिनट; कारोबार न होने पर निर्धारित विकल्प | SEBI |
| एक्सपायरी पर डेरिवेटिव निपटान | नकद बाजार के अंतिम 30 मिनट के VWAP पर आधारित अलग इंडेक्स और शेयर नियम | SEBI |
| डेरिवेटिव कारोबार की समयसीमा | सामान्यतः 3:45; एक्सपायर हो रहे इंडेक्स अनुबंध एक्सपायरी के दिन 3:30 पर बंद; शेयर डेरिवेटिव 3:45 तक | SEBI |
| नकद बाजार का पोस्ट-क्लोज सत्र | 3:50–4:00 बजे, बंद भाव पर सौदे | SEBI |
15 और 30 मिनट में फर्क क्यों?
VWAP कारोबार की मात्रा से भारित औसत भाव है: भाव × मात्रा का कुल योग, कुल मात्रा से भाग देने पर मिलता है। CAS के संदर्भ भाव के लिए नकद बाजार के अंतिम 15 मिनट लिए जाते हैं; सर्कुलर में कारोबार न होने के विकल्प भी हैं। एक्सपायरी पर इंडेक्स निपटान के लिए उसके घटक शेयरों के अंतिम 30 मिनट के VWAP से इंडेक्स मूल्य निकलेगा। शेयर डेरिवेटिव में सभी एक्सचेंजों के नकद बाजार में संबंधित शेयर का अंतिम 30 मिनट का VWAP लिया जाएगा। संदर्भ भाव अपने आप ऑक्शन में तय अंतिम बंद भाव नहीं होता।
लंबित ऑर्डर के लिए बाद की तारीख
पैरा 4.8 लंबित लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर से जुड़ा है। आइसबर्ग ऑर्डर सामान्य कारोबार में अपनी कुल मात्रा का केवल कुछ हिस्सा दिखाता है। नए नियम में पात्र लंबित आइसबर्ग ऑर्डर पूरी मात्रा दिखाने वाले लिमिट ऑर्डर बनकर CAS में आएँगे, जब तक ग्राहक ने मूल ऑर्डर देते समय ऐसा न करने का विकल्प चुना हो। समय-प्राथमिकता की अलग शर्तें भी हैं। यह हिस्सा फरवरी से लागू होगा, दिसंबर से नहीं।
ऑर्डर बदलने से पहले क्या जाँचें?
अपने सेगमेंट, ऑर्डर और अनुबंध के लिए एक्सचेंज तथा ब्रोकर की लागू करने वाली सूचनाएँ पढ़ें। लिमिट ऑर्डर में कीमत की सीमा रहती है; मार्केट ऑर्डर वही सीमा नहीं देता। CAS में अलग चरणों की अलग पाबंदियाँ हैं। 3:36 बजे से मार्केट ऑर्डर में संशोधन या उसे रद्द करने की अनुमति नहीं होगी। सर्कुलर सौदा होने, बेहतर भाव या कम जोखिम की गारंटी नहीं है। भविष्य की दोनों तारीखों को बीत चुका क्रियान्वयन नहीं माना गया है।
संबंधित रिपोर्ट: MRPL की रिकॉर्ड और भुगतान की अलग तारीखें. वह कॉरपोरेट कार्रवाई की समयसूची है, CAS लागू होने का कार्यक्रम नहीं।
स्रोत और रिपोर्ट की सीमाएँ
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